बालोतरा. राजपुरोहित युवा जागृति मंच ने
राजपुरोहित समाज के एकमात्र आहोर से शंकरसिंह
आहोर के विधायक निर्वाचित होने पर खुशी जाहिर
की। मंच के महामंत्री भवानीसिंह तिरसींगड़ी ने
बताया कि शंकरसिहं आहोर के विजयी होने पर
राजपुरोहित समाज में खुशी की लहर है। मंच के
सचिव राजेंद्रसिंह घंटियाल, संगठन मंत्री पिंटूसिंह
मूंगड़ा, उपाध्यक्ष पारसमल मनणा, अध्यक्ष
पुखराजसिंह सिंहा, प्रवक्ता विक्रमसिंह सिंहा,
कोषाध्यक्ष जेठूसिंह सिंहा, थानसिंह सराणा,
गणपतसिंह सिंहा ने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष
वसुंधरा राजे का आभार व्यक्त किया।
Rajpurohit Darpan is monthly magazine.samaj ko ek juth(unity) karne ka pryash राजपुरोहति दर्पण , rajpurohit samaj news all india,
Definition List
Showing posts with label Rajpurohit Samaj. Show all posts
Showing posts with label Rajpurohit Samaj. Show all posts
navratri puja 2013
नवरात्र आज से, जानिए कब और कैसे शुरू करें पूजन
शक्ति की देवी मां दुर्गा का नौ दिनों तक चलने वाला पूजन शनिवार, पांच अक्टूबर से शुरू हो रहा है। नवरात्रि के इस पूजन के लिए कौन सा समय शुभ है, किस समय में घट स्थापना करना सही है और पूजा विधि क्या हो, आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
घट स्थापना- घट स्थापना का समय 05 अक्टूबर 2013, शनिवार को अश्रि्वन शुक्ल प्रतिपदा के दिन प्रात:काल 08 बजकर 05 मिनट से 09 बजे तक रहेगा। इसके पश्चात दोपहर 12 बजकर 03 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक के मध्य में भी घट स्थापना की जा सकती है। 1. पहला नवरात्र- प्रथमा तिथि, 5 अक्टूबर 2013, दिन शनिवार, 3:35 तक। 2. दूसरा नवरात्र- द्वितीया तिथि, 6 अक्टूबर 2013 दिन रविवार, 3:17 तक। 3. तीसरा नवरात्र- तृतीया तिथि, 7 अक्टूबर 2013, दिन सोमवार, 1:58 तक। 4. चौथा नवरात्र- चतुर्थी तिथि, 8 अक्टूबर 2013 , मंगलवार, 12:05 तक। 5. पांचवां नवरात्र- पंचमी तिथि, 9 अक्टूबर 2013, बुधवार, 10:01 तक। 6. छठा नवरात्र- षष्ठी तिथि, 10 अक्टूबर 2013, गुरुवार, 07:51 तक। 7. सातवां नवरात्र- सप्तमी तिथि, 11 अक्टूबर 2013, शुक्रवार, 05:39 तक। 8. आठवां नवरात्र, अष्टमी तिथि, 12 अक्टूबर 2013, शनिवार, 03:27 तक। 9. नौवां नवरात्र- नवमी तिथि, 13 अक्टूबर 2013, रविवार, 01:18 तक। 10. दशहरा- दशमी तिथि, 13 अक्टूबर 2013, रविवार, 01:18 से आरंभ और 14 अक्टूबर को प्रात:काल 11:16 तक देवी की अराधना इंस मंत्र से करें- देवी आराधना मंत्र - . शैलपुत्री- वन्दे वांछित लाभाय
navratri 2013
नवरात्रि एक हिंदू पर्व है। नवरात्रि संस्कृत शब्द है,
जिसका अर्थ होता है नौ रातें । यह पर्व साल में चार बार आता है।चैत्र,आषाढ,अश्विन,पोषप्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाता है।
नवरात्रि के नौ रातो में तीन देवियों - महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वतीया सरस्वतीकि तथा दुर्गा के नौ स्वरुपों की पूजा होती है जिन्हे नवदुर्गा कहते हैं । नौ देवियाँ है :- श्री शैलपुत्री श्री ब्रह्मचारिणी श्री चंद्रघंटा श्री कुष्मांडा श्री स्कंदमाता श्री कात्यायनी श्री कालरात्रि श्री महागौरी श्री सिद्धिदात्री शक्ति की उपासना का पर्व शारदेय नवरात्र प्रतिपदा से नवमी तक निश्चित नौ तिथि, नौ नक्षत्र, नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ सनातन काल से मनाया जा रहा है। सर्वप्रथम श्रीरामचंद्रजी ने इस शारदीय नवरात्रि पूजा का प्रारंभ समुद्र तट पर किया था और उसके बाद दसवें दिन लंका विजय के लिए प्रस्थान किया और विजय प्राप्त की । तब से असत्य, अधर्म पर सत्य, धर्म की जीत का पर्व दशहरा मनाया जाने लगा। आदिशक्ति के हर रूप की नवरात्र के नौ दिनों में क्रमशः अलग-अलग पूजा की जाती है। माँ दुर्गा की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है।
जिसका अर्थ होता है नौ रातें । यह पर्व साल में चार बार आता है।चैत्र,आषाढ,अश्विन,पोषप्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाता है।
नवरात्रि के नौ रातो में तीन देवियों - महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वतीया सरस्वतीकि तथा दुर्गा के नौ स्वरुपों की पूजा होती है जिन्हे नवदुर्गा कहते हैं । नौ देवियाँ है :- श्री शैलपुत्री श्री ब्रह्मचारिणी श्री चंद्रघंटा श्री कुष्मांडा श्री स्कंदमाता श्री कात्यायनी श्री कालरात्रि श्री महागौरी श्री सिद्धिदात्री शक्ति की उपासना का पर्व शारदेय नवरात्र प्रतिपदा से नवमी तक निश्चित नौ तिथि, नौ नक्षत्र, नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ सनातन काल से मनाया जा रहा है। सर्वप्रथम श्रीरामचंद्रजी ने इस शारदीय नवरात्रि पूजा का प्रारंभ समुद्र तट पर किया था और उसके बाद दसवें दिन लंका विजय के लिए प्रस्थान किया और विजय प्राप्त की । तब से असत्य, अधर्म पर सत्य, धर्म की जीत का पर्व दशहरा मनाया जाने लगा। आदिशक्ति के हर रूप की नवरात्र के नौ दिनों में क्रमशः अलग-अलग पूजा की जाती है। माँ दुर्गा की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है।kheteshwar maharaj
"* Brahmavatar संत श्री 1008 Khetaramji महाराज *"
राजपुरोहित समाज के "*" सूर्य "*"
जन्म तारीख: 22 अप्रैल 1912 (विक्रम Samavat 1969 वैशाख सुदी पंचम, सोमवार) पिता: श्री. Shersingh जी राजपुरोहित (Udesh) माँ: श्रीमती. Sanagari देवी जन्म स्थान: खेड़ गांव तहसील: Sanchour, जिला - जालोर राज्य: राजस्थान जन्म नाम: Khetaram Vairagya: 12 साल की उम्र में. गुरू: श्री Ganeshanandan जी महाराज विशेषता: जीवा दया (जीवन का संरक्षण) की ओर राजपुरोहित समाज में एक मंच पर एक साथ होना, Kalayug में अंतर्राष्ट्रीय स्तर वचन सिद्ध Mahapurush के लिए शुरू हो गया है. **
* संत Khetaramji / Kheteshwar जी महाराज *
स्वर्गीय संत Khetaramji / Kheteshwar जी महाराज धर्म और कर्म के माध्यम से एक सच्चे संत थे. उन्होंने कहा कि सभी जातियों और धर्मों के पार काटने अनुयायियों की थी जो एक दिव्य आत्मा थी. वह आत्मज्ञान प्राप्त करने के लिए आध्यात्मिक साधन के महत्व पुनर्जीवन और अन्य सभी आदमी ऊपर पर बल मानवता जातिवाद जैसी बाधाओं को बनाया आदि पर भगवान ब्रह्मा मंदिर का उद्घाटन करने के बाद 6 मई 1984 को उसकी मांसल tebernacle नीचे रखा जा रहा है परमात्मा और स्वर्गीय निवास को छोड़ दिया 5 मई, ब्रह्माजी की मूर्ति की स्थापना के बाद 1984 यानी. उसके चेलों और अपने समुदाय के सदस्यों Rajpurohits तब ब्रह्मा मंदिर आवास संत का एक lifesize मूर्ति के पास के इलाके में देर संत को समर्पित एक विशाल और सुंदर मंदिर बनवाया भावनाओं से अभिभूत. मकराना संगमरमर संत श्री Kheteshwar जी महाराज की खड़ी होने वाली स्मारक के लिए इस्तेमाल किया गया है.
Subscribe to:
Posts (Atom)
