इतिहास, संस्कृति व संबंधों को और आगे बढ़ाने व समझने की जरूरत : गजसिंह

इतिहास, संस्कृति व संबंधों को और आगे बढ़ाने व समझने की जरूरत : गजसिंह
जोधपुर। महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश शोध केन्द्र, मेहरानगढ़ म्युजियम ट्रस्ट व राजपुरोहित समाज द्वारा प्रकाशित व डॉ. महेन्द्रसिंह नगर द्वारा सम्पादित 憫राजपुरोहितों का राजस्थान के राजपरिवारों से सम्बन्ध憫 पुस्तक का बुधवार सांय को जयनारायण व्यास टाऊन हॉल में लोकार्पण समारोह आयोजित हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व नरेश गजसिंह ने कहा कि पुस्तक से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी, एक बार पुन: सम्बन्ध जागृत होंगे। उन्होंने कहा कि पहले छत्तीस कौम के साथ मिलकर काम करते, आज अलगाववाद, जातिवाद के कारण सम्बन्धों को भूलते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजपुरोहित समाज व राजपरिवार की परम्पराएं व सम्बन्ध बने रहे, उन्हें और मजबूती प्रदान करें, ऐतिहासिक सम्बन्ध किसी तरह टूटे नहीं। आज इतिहास, संस्कृति व सम्बन्धों को और आगे बढ़ाने की आवश्यकता है, इन्हें समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संतों के आशीर्वाद व मार्गदर्शन से समाज आगे बढ़ता है। संत तुलछारामजी महाराज का मारवाड़ में नाम है। उन्होंने कहा कि मारवाड़ का व्यक्ति बाहर जाकर भी मारवाड़ के विकास की बात भूलता नहीं, सम्बन्ध बनाये रखता है।
समारोह अध्यक्ष जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बी.एस. राजपुरोहित ने कहा कि जमाना शिक्षा का है। बालक-बालिका में शिक्षा के लिए किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करें, बालिका शिक्षा पर भी विशेष ध्यान देवें। शिक्षा से ही व्यक्ति जीवन में आगे सफलता प्राप्त करता है।
विशिष्ट अतिथि मुम्बई भाजपा के अध्यक्ष व पूर्व मंत्री राज के. पुरोहित ने अपने उद्बोधन में कहा कि पुस्तक राजपुरोहित व राजपूतों के प्रति सम्मान को प्रदर्शित करने वाला प्रकाशन है। पुस्तक के अध्ययन से विद्यार्थी इतिहास व पूर्वजों के साथ जुड़ेगा। उन्होंने महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश शोध केन्द्र का पुस्तक प्रकाशन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पुस्तक से समाज को नई दिशा मिलेगी व सम्बन्धों को मजबूती भी प्राप्त होगी। मुख्य वक्ता प्रो. जहूर खां मेहर ने कहा कि राजपुरोहित समाज की पौराणिक काल से ही प्रमुख भूमिका रही। युद्धों में भी इनकी प्रमुखता रहती थी। पुस्तक से ऐतिहासिक, सामरिक जानकारी मिलेगी।  विशिष्ट अतिथि राजपुरोहित शोध संस्थान तिंवरी के संस्थापक प्रहलादसिंह राजपुरोहित ने भी समारोह को सम्बोधित किया।
मेहरानगढ़ म्युजियम ट्रस्ट के महानिदेशक व पुस्तक के सम्पादक डॉ. महेन्द्रसिंह नगर ने पुस्तक पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पुस्तक में लगभग डेढ़ सौ ऐतिहासिक पत्रों का प्रकाशन किया गया है। इन पत्रों से उस समय के राजपरिवार के साथ राजपुरोहितों के सम्बन्धों के बारे में जानकारी मिलती है। उस समय के ऐतिहासिक घटनाक्रम व वातावरण की भी जानकारी पत्रों से प्राप्त होती है। पुस्तक शोध के विद्यार्थियों के लिए ऐतिहासिक दस्तावेज सिद्ध होगी। प्रारम्भ में पूर्व नरेश गजसिंह ने पुस्तक का विमोचन किया। समारोह का शुभारम्भ खेतेश्वर व गणेशजी की मूर्ति के सम्मुख दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ। समारोह में आसोतरा धाम के संत तुलछारामजी महाराज के सान्निध्य में हुआ। समारोह में महारानी हेमलता राज्ये सहित राजेन्द्रसिंह राजपुरोहित, कानसिंह राजपुरोहित, अर्जुनसिंह राजपुरोहित, भूरसिंह, पहाड़सिंह, हनुमानसिंह राजपुरोहित, देवीसिंह राजपुरोहित, रामचन्द्रसिंह बासनी, पूर्व विधायक नारायणराम बेड़ा, घनश्याम ओझा, देवीसिंह चम्पाखेड़ी, नरपतसिंह राजपुरोहित, गोविन्द्रसिंह तिंवरी, अर्जुनसिंह तिंवरी, सुमेरसिंह कानोडिया, नाहरसिंह अराबा सहित राजपुरोहित समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। आभार कानसिंह राजपुरोहित ने व्यक्त किया व संचालन जफ रखान सिंधी ने किया।

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